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सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को अगले सत्र से खाते में पैसे के बदले मिलेंगी किताबें


    • ● आरटीई के तहत स्कूली छात्रों को निशुल्क मिलेंगी किताबें ● शिक्षा विभाग ने तैयार किया किताब वितरण का शिड्यूल ● एक सप्ताह में प्रकाशकों को जिम्मेदारी देने के लिए आएगा टेंडर ● किताब के बदले विद्यार्थियों को पैसे देने की योजना कारगर नहीं रही
      ●डेढ़ करोड़ बच्चों को अप्रैल के पहले हफ्ते में मिल जाएंगी किताबें, तैयारी में जुटे अधिकारी 
    • पटना, बी आर भारत ब्यूरो। बिहार के सभी सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को अब नए सत्र से उनके खाते में पुस्तक क्रय की राशि नहीं भेजी जाएगी। बल्कि पांच-छह साल पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल होगी। 6 से 14 साल के बच्चों के अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा कानून (आरटीई) के तहत एक बार फिर से राज्य सरकार निशुल्क किताबें उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद शिक्षा विभाग ने बच्चों तक पाठ्य-पुस्तक पहुंचाने की पुरानी व्यवस्था पर गंभीरता से काम आरंभ कर दिया है। अब जल्द ही प्रकाशक तय किये जायेंगे और उन्हें किताब छापकर बच्चों तक निशुल्क पहुंचाने का जिलावार जिम्मा दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर प्रकाशक चयन का टेंडर कर दिया जाएगा।शिक्षा विभाग नये शैक्षणिक सत्र 2023-24 से 72 हजार प्रारंभिक विद्यालयों के तकरीबन डेढ़ करोड़ बच्चों को मुफ्त किताब देगा। तमाम बच्चों को किताबों का सेट बनाकर अप्रैल के पहले हफ्ते में देना सुनिश्चित कराने के लिए अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के निर्देश पर संबंधित अधिकारी जुट गये हैं। बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक निगम ने तैयारियां आरंभ कर दी हैं। किताबों को छापने की जिम्मेदारी निजी प्रकाशकों को मिलेंगी। ये प्रकाशक कौन-कौन होंगे तथा किताब वितरण को लेकर कब क्या होगा, इसका पूरा कैलेंडर अपर मुख्य सचिव की देखरेख में तैयार किया जा रहा है। गौरतलब है कि देश के ज्यादातर राज्यों में आरटीई के तहत प्रारंभिक कक्षा के विद्यार्थियों को किताबें ही मुहैया कराई जाती हैं। बिहार में भी यही व्यवस्था लागू थी लेकिन प्रकाशक तय करने, किताबें छापने, उन्हें जिला, प्रखंड और पंचायत तक पहुंचाने तथा विद्यालय ले जाकर हर बच्चे को देने तक में किसी सत्र में अक्टूबर तो किसी सत्र में यह दिसम्बर में जाकर संभव हो पाया। बच्चे सत्र के छह-आठ महीने बिना किताबों के ही पढ़ने को मजबूर हो रहे थे। ऐसे में 2017-18 में किताब देने की जगह बच्चों के खाते में पैसा देने का निर्णय हुआ। पिछले पांच सत्र से पहली से पांचवीं के बच्चों को 250 रुपए जबकि कक्षा 6 से आठ के बच्चों को 400 रुपए पुस्तक क्रय के एवज में उनके खाते में दिया जा रहा है। इस मद में हर साल 400 करोड़ से लेकर 520 करोड़ तक बच्चों के खाते में भेजे गए हैं लेकिन पैसा पाने के बावजूद महज 25 से 40 फीसदी बच्चे ही किताब खरीद रहे हैं। बच्चों के गरीब अभिभावक किताब क्रय के पैसे का उपयोग अन्य मद में कर ले रहे हैं।
    • कक्षावार राशि
    • ● कक्षा एक से पांच-250 रुपए प्रति छात्र
    • ● कक्षा 6 से आठ 400 रुपए प्रति छात्र


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