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22 गांवों में बेरोक छलक रहे हैं शराब के जाम.. एक कॉल पर घर तक पहुंच रही शराब


 

धुबनी:एक तरफ बिहार सरकार ने शराब पर प्रतिबंध के लिए पूरी ताकत और पूरा अमला झोक दिया है,दूसरी तरफ मधुबनी के साहरघाट थाना अंतर्गत 22 गांवों में धड़ल्ले से शराब के जाम छलक रहे हैं.

कौन कहता है साहब कि यहां शराब बंदी है, यहां शराब नहीं बिकती है। साहरघाट थाना क्षेत्र में 22 गांवों में आज भी पुलिस की मेहरबानी से बिक रही है शराब। गांव की गलियों की कौन कहे, एसएच-75 किनारे मुख्य सड़क पर दर्जनों जगह पर बिक रही है शराब। साहरघाट और बसबरिया के अलावे मुख्य सड़क किनारे पान की दुकानों में भी खुलेआम बिक रही है शराब। और तो और,साहरघाट थाना की नाक के नीचे साहरघाट बाजार में दर्जनों जगह पर बेचीं जा रही है शराब।

पुलिस को भी पता है पर बंद मुट्ठी के दम पर पुलिस अंजान बनी हुई है। बारातों में चल रहा जाम,सड़कों पर नाच,कहां है साहरघाट पुलिस प्रशासन?

जब से इस थाने में दारोगा विजय पासवान की पोस्टिंग हुई है,तबसे शराब की तस्करी भी धड़ल्ले से हो रही है।शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद भी क्षेत्र में  जमकर शराब मंगवाई और परोसी जा रही है. शादी के मौसम में अगर पुलिस प्रशासन ने साथ ना दिया होता,तो शायद शादियों में रंग नहीं जमता. सरकार के लाख दावे के बाद भी पुलिस प्रशासन की कमजोरी या कोताही के कारण शराब की बोतल से जाम छलक रहा है..

मधवापुर में सीमावर्ती नेपाल और पड़ोसी राज्यों से जमकर शराब मंगवाई और परोसी जा रही है.खासकर साहरघाट थाना क्षेत्र का शायद ही अब कोई ऐसा गाँव बचा हो,जहां शराब नहीं बेचीं जा रही हो। इस बात की जानकारी पुलिस को भी है,पर नजराना लेकर प्रतिबन्ध के बावजूद शराब बेचने की खुली छूट दी गयी है। साहरघाट थाना क्षेत्र में लगभग 22 गांवों में आज भी बिक रही है शराब। क्या आप यकीन करेंगे कि पत्रकार और यहां के आम लोगों को पता हो ,और पुलिस को पता नहीं हो। जबकि हर गांव में पुलिस का अपना चौकीदार मौजूद है।यह हजम होने वाली बात नहीं है।

वसूली के लिए अवैध शराब विक्रेताओं की सूची रखती है पुलिस

थाना क्षेत्र के लगभग हर गांवों में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार करने वालों की सूची थाने के पास है,जिसके आधार पर हर महीने पुलिस माहवारी वसूलती है। यही वजह है कि साहरघाट थाना क्षेत्र के 22 गांवों में खुलेआम शराब बिकती है।

हद तो यह कि पुलिस को जब इसकी सूचना दी जाती है तो पुलिस कोई एक्शन नहीं लेती है। यही कारण है कि आपको दिन के उजाले में भी सड़क किनारे शराब पीकर लुढ़के कई पियक्कड़ मिल जाएंगे। हैरत की बात यह कि यह सबको दिखता है,लेकिन साहरघाट पुलिस को नहीं दिखती है। ऊपर से हद यह कि पियक्कड़ों की सूचना देने पर भी यहां की पुलिस हरकत में नहीं आती है। कभी-कभार छापामारी करने का बस नाटक भर करती है साहरघाट पुलिस,यही वजह है कि एक कॉल पर घर तक पहुंच रही है शराब।

दरअसल नियम के मुताबिक बिहार के किसी भी क्षेत्र में शराब लाना अपराध है, लेकिन शराबबंदी के सात साल पूरे होने को है,परन्तु तस्वीरें कुछ और बयान कर रही है कि यहां शराब है बंदी नहीं. है भी तो प्रभावी बिल्कुल नही हैं शराब न केवल बिक रही है बल्कि बाजारों, बारातों में खुलेआम इसका इस्तेमाल भी किया जा रहा है. बारातों में जाम चल रहे है उनकी तस्वीरें बोल रही है कि शराब बिक रही है इसको झुठलाया नहीं जा सकता है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब शराब बेचने वालों की मदद खुद पुलिस कर रही हो तो लाख टके का सवाल यह है कि सरकार के स्तर से इस पर रोक कैसे लगेगी?

इस सम्बन्ध में साहरघाट के थानाध्यक्ष विजय पासवान कहते हैं कि पुलिस शराबबंदी कानून का सख्ती से पालन करती है। समय-समय पर छापेमारी कर इसके कारोबारी को पकड़ कर जेल भेजती है।

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