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जयनगर में झिझिया के माध्यम से माता रानी को रिझाने का किया गया प्रयास

  •  महिलाओं ने मां भगवती से बुरी शक्तियों से रक्षा करने के लिए की प्रार्थना

ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने महाराष्ट्र और गुजरात के डांडिया व गरबा की तरह झिझिया से माता दुर्गा को प्रसन्न व रिझाने का प्रयास किया। रेलवे स्टेशन परिसर में दुर्गा पूजा पंडाल में झिझिया का आयोजन किया गया है। लोग जमकर झिझिया का आनंद उठाते हैं। मिथिलांचल से लुप्त हो रही प्रमुख नृत्य झिझिया लोगों के स्मृति पटल पर आने लगी है। पहली बार बिहार के सबसे ऊंचा दुर्गा मंदिर में भव्यता के साथ पारंपरिक नृत्य झिझिया का आयोजन किया गया। झिझिया खेल रही महिलाओं ने बाद में संदेश दिया कि लुप्त हो रहे सांस्कृतिक नृत्य झिझिया को भी महाराष्ट्र व गुजरात की डांडिया व गरबा की तरह लोकप्रिय बना सकते हैं। झिझिया नृत्य कर रही समूह में कुल 9 महिलाएं होती है जो अपने सिर पर जलते दीपक और छिद्र वाली घड़ा लेकर नाचती है। बुरी आत्माओं से बचाने व माता को खुश करने के लिए नवरात्रि में
महिलाओं के द्वारा झिझिया नृत्य करने की परंपरा रही है लेकिन नई पीढ़ी के द्वारा पश्चमी सभ्यता को ग्रहण करने से
हमारी सांस्कृतिक नृत्य झिझिया लुप्त की कगार पर चला गया। लेकिन आयोजकों के द्वारा झिझिया कार्यक्रम लोगों को भाने लगा है। झिझिया नृत्य का मुख्य उद्देश्य माता को खुश करने का प्रयास करना और बुरी शक्तियों से रक्षा करना है।
झिझिया के दौरान महिलाएं बुरी शक्तियों की खूब बुराई करती है तो वहीं ब्रह्म बाबा से आशीर्वाद भी लेती हैं। आदिशक्ति मां
दुर्गे के सामने मंदिर परिसर में करीब 2 हजार से अधिक लोग पारंपरिक नृत्य देखकरमुग्ध हो गए। महाआरती सम्पन्न होने के बाद आयोजक झिझिया नृत्य शुरू कराते हैं।
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